


मेक्सिकन बीटल!
जी हाँ,
यह वही निरामिष कीड़ा है जो दुनिया भर में कांग्रेस घास की पत्तियां खाने के लिए मशहूर है। उसी कांग्रेस घास की जो कभी आज़ादी की सुखद:
सांस लेने पीएल-480
स्कीम के तहत आयातित मैक्सिकन गेहूं के बीज के साथ भारत में आया था। गणतंत्र में घोडा हो या घास, सभी कों फलने-फूलने के समान अवसर होते है। इन्ही अवसरों का भरपूर लाभ उठाते हुए यह घास भी हिंदुस्तान में चारों ओर छा गया। बस्ती हों या बीहड़, उर्वरा हों या बंजर, सार्वजनिक पार्कों, आवासीय कालोनियों, बगीचों, सडक के किनारों, कच्चे रास्तों, नहर, नालियों व रेलवे पटरियों आदि के साथ-साथ लाखों हेक्टेयर भूमि पर कब्ज़ा जमा कर घोड़ों कों पटकनी देने में सफल हुआ है। अब अपने देश के तरक्की-पसंदों कों इस घास की अप्रत्याशित प्रगति कहाँ पसंद आनी थी? इसीलिए इसे नियंत्रित करने के चहुमुखी प्रयास हुए। एक से बढकर एक जहरीले खरपतवारनाशियों का सहारा लिया गया, इसे समूल नष्ट करने के लिए जनअभियान चलाये गये। पर सब बेकार और यह घास हमें यूँ ही ठोसे दिखाता रहा। हम भी कहाँ हार मानने वाले थे? इस घास पर अंकुश लगाने के लिए एक मेक्सिकन बीटल ढूंढ़ लाये। वैसे तो इस पर्णभक्षी भुंड की दुनिया में 100 के लगभग प्रजातियाँ पाई जाती हैं पर हमारे यहाँ कांग्रेस घास पर देखी जाने वाली मेक्सिकन बीटल को जीवों की नामकरण-प्रणाली में Zygogramma bicolrata कहा जाता है। खुद भी शुद्ध शाकाहारी और गर्ब खे जाने वाले इसके बच्चे भी शुद्ध शाकाहारी.
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